Hamari adhuri kahani by me (ritik Pandey)

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सुनहरा मौसम (रितिक पान्डेय)

मौसम है,
सुनहरा मौसम है।

बादल फैला चारो ओर,

फिर भी,

किरने बिखरी पर्वतों पर।

तिरते इन बादलों को,

तीव्र गति से ये किरनें।

सुर्य की सुनहरी किरनें,

पहुँच गई धरा पर।।
मौसम है,

सुनहरा मौसम है।

इंद्र-धनुष के, सात रंगो मे,

लिपट गया है आसमां।

प्रेम सुधा का गीत गाता,

नृत्य कर रहा, ये जहां।।

पंख फैलाए, 

मोर नाचते।

मधुर ध्वनि में, 

कोयल गाती।

संगीत के, इन सात स्वरों मे,

घिर गया है आसमां।।
मौसम है,

सुनहरा मौसम है।

बच्चे गाते-मचाते सोर,

ध्वनि गूंजती चारो ओर।

मानो, लोगों से यह कहते,

अब हो गया भोर।।

मौसम है,

सुनहरा मौसम है।।

                     (Written by- RITIK PANDEY)

शिक्षक (रितिक पान्डेय)

जिसे देख 
आदर से सर झुक जाए,

वो शिक्षक है।

जिवन के कठिन पथ पर

जो चलना सिखाए,

वो शिक्षक है।

जो हमें 

प्रेम का पाठ पढ़ाए,

वो शिक्षक है।।

जो हमें 

कठिन परिस्थितियों में भी

हँसना सिखाए,

वो शिक्षक है।।

मात-पिता का नाम है दूजा,

शिक्षक का सम्मान है पूजा।।

शब्द नहीं है शब्दकोष मे,

कैसे करूँ धन्यवाद आपका।।

हुँ जहाँ मै आज खड़ा,

है बड़ा योगदान आपका।।

इस योग्य बनाया है मुझे,

प्राप्त करूँ मै अपना लक्ष्य।।

जब भी लगा मुझे, मै हारा,

मात-पिता और आपने दिया सहारा।।

करलें कितनी भी उन्नती हम,

गुरू का महत्व ना होगा कम।।

इस विचार के साथ, शिश झुकाकर,

करता हुँ आपको सत्-सत् नमन।।

                      (written by- RITIK PANDEY)

मंजिल से दूर ___(रितिक पान्डेय)


मंजिल अभी दूर है,

उसे पाना भी जरूर है ।

है नए ,सपने कई ,

सपनो की राह

अभी दूर है ।

उसे पाना भी जरूर है ।।

प्रत्याशा मे हुँ,

अपने सपनों का ।

कहीं उसे पाने की मादकता

खंड-खंड न करदे ,

मेरे आशाओं की ईमारत

विखंड न करदे ।।

जो मिट जाऊँ मै

सपनों की प्रत्याशा मे

रोदन-राग न लिए फिरना ।

करना तुम एहसान मुझपर,

मेरे मात-पिता को 

साहस दिए फिरना ।।

रोदन-राग न लिए फिरना ।।

करना एक आखिरी 

एहसान मुझ पर ,

यत्न ,मेरे सपनों को 

पूर्ण करने का,

तुम जरूर करना ।।

जब आए, मेरी याद तुम्हे,

मेरी माँ को 

उसके दीपक का स्मरण 

जरूर कराना ।।

मेरे मात-पिता को

साहस दिए फिरना,

रोदन राग न लिए फिरना ।।

                   Written by–RITIK PANDEY

मेरी माँ      (कवि -रितिक पान्डेय)

जब उँगली पकड़

तुमने चलना सिखाया ।

मेरी माँ,

वो दिन याद आया,

और आँखों मे

आँसू लाया ।।

बावला था मै,

मेरी माँ,

जो तेरे प्यार को

समझ ना पाया ।।

माँ क्यों दूर हुआ,

मै तुझसे,

आज वो दिन

याद आया ।

और आँखों मे

आँसू लाया ।।
जब मै छोटा था,

तुमने हर सुख,

हर खुशी से

वाकीफ किया मुझे।

जब बड़ा हुआ,

मै तुम्हे समय न दे सका।
माफ कर मेरी माँ मुझे,

मै बड़ा बदनसीब था,

जो तेरे प्यार को

समझ न सका ।।
जब कभी 

मेरी आँखो मे 

आँसू आया ।

तुमने मुझे,

अपनी गोद मे खिलाया।
लेकीन आज तेरी याद मे

मै रो दिया ।।
मेरी माँ 

वो दिन याद आया,

और आँखो मे 

आँसू लाया ।।

                    (Written by- RITIK PANDEY)

स्वच्छता —(रितिक पान्डेय)

निकली टोली आज,

हम मातृभूमी के लालों की।

ज़ज्बा लेकर चले हैं हम,

सुंदर चमन बनाने को।।

चमक्ते सितारे के जैसा,

अपना वतन बनाने को।

निकली टोली आज हमारी,

सुंदर चमन बनाने को।।

साफ है दिल के, सच्चे हम,

अपने वतन के बच्चे अच्छे हम।

चलो साथीयों, निकले अब,

भारत को स्वच्छ बनाने को।

निकली टोली आज हमारी,

सुंदर चमन बनाने को।।

बाते कर ली बड़ी-बड़ी,

छोटी बात भूला दी है।

रास्ते पर खुद कूड़ा फेंका,

भाषण मे आसमान उठा ली है।।

वादा किया इन्होने,

स्वच्छ भारत बनाने को।

कूड़ा देखा सड़क पर,

शर्माते इसे उठाने को।।

समझाएँ क्या इन्हे हम,

क्या रह गया बताने को।

चलो साथीयों, निकले अब,

भारत को स्वच्छ बनाने को।।

मोदी जी की तैयारी है,

अब हमारी बारी है।

आओ मित्रों, आगे आओ,

भारत को स्वच्छ बनाने को।।

        Written by–(RITIK PANDEY)