✏तड़प ✏

सागर मे पानी है जितनी

आँखों मे आँसू है उतनी।।

सारा जहाँ भीग गया इन आँसूओं से

धक-धक करता दिल सिने मे।।

आँखों की नमी बयाँ करता हैं

ये दिल कहता है।।

होले-होले कहता है

सहमा-सहमा सा रहता हूँ।।

प्यार भी किया, इकरार भी किया,इंतज़ार भी किया,

उसने मेरे दिल पर हल्का सा वार भी किया।।

चोट दिया इस वार ने इतनी

भीगे बदन बरसात मे जितनी।।

बिखर गया मै, निखर गई वो

अश्क बहें नयनों से इतने, संवर गई वो।।

written by- RITIK PANDEY

सुनहरा मौसम (रितिक पान्डेय)

मौसम है,
सुनहरा मौसम है।

बादल फैला चारो ओर,

फिर भी,

किरने बिखरी पर्वतों पर।

तिरते इन बादलों को,

तीव्र गति से ये किरनें।

सुर्य की सुनहरी किरनें,

पहुँच गई धरा पर।।
मौसम है,

सुनहरा मौसम है।

इंद्र-धनुष के, सात रंगो मे,

लिपट गया है आसमां।

प्रेम सुधा का गीत गाता,

नृत्य कर रहा, ये जहां।।

पंख फैलाए,

मोर नाचते।

मधुर ध्वनि में,

कोयल गाती।

संगीत के, इन सात स्वरों मे,

घिर गया है आसमां।।
मौसम है,

सुनहरा मौसम है।

बच्चे गाते-मचाते सोर,

ध्वनि गूंजती चारो ओर।

मानो, लोगों से यह कहते,

अब हो गया भोर।।

मौसम है,

सुनहरा मौसम है।।

(Written by- RITIK PANDEY)

शिक्षक (रितिक पान्डेय)


जिसे देख
आदर से सर झुक जाए,

वो शिक्षक है।

जिवन के कठिन पथ पर

जो चलना सिखाए,

वो शिक्षक है।

जो हमें

प्रेम का पाठ पढ़ाए,

वो शिक्षक है।।

जो हमें

कठिन परिस्थितियों में भी

हँसना सिखाए,

वो शिक्षक है।।

मात-पिता का नाम है दूजा,

शिक्षक का सम्मान है पूजा।।

शब्द नहीं है शब्दकोष मे,

कैसे करूँ धन्यवाद आपका।।

हुँ जहाँ मै आज खड़ा,

है बड़ा योगदान आपका।।

इस योग्य बनाया है मुझे,

प्राप्त करूँ मै अपना लक्ष्य।।

जब भी लगा मुझे, मै हारा,

मात-पिता और आपने दिया सहारा।।

करलें कितनी भी उन्नती हम,

गुरू का महत्व ना होगा कम।।

इस विचार के साथ, शिश झुकाकर,

करता हुँ आपको सत्-सत् नमन।।

(written by- RITIK PANDEY)

मंजिल से दूर ___(रितिक पान्डेय)


मंजिल अभी दूर है,

उसे पाना भी जरूर है ।

है नए ,सपने कई ,

सपनो की राह

अभी दूर है ।

उसे पाना भी जरूर है ।।

प्रत्याशा मे हुँ,

अपने सपनों का ।

कहीं उसे पाने की मादकता

खंड-खंड न करदे ,

मेरे आशाओं की ईमारत

विखंड न करदे ।।

जो मिट जाऊँ मै

सपनों की प्रत्याशा मे

रोदन-राग न लिए फिरना ।

करना तुम एहसान मुझपर,

मेरे मात-पिता को 

साहस दिए फिरना ।।

रोदन-राग न लिए फिरना ।।

करना एक आखिरी 

एहसान मुझ पर ,

यत्न ,मेरे सपनों को 

पूर्ण करने का,

तुम जरूर करना ।।

जब आए, मेरी याद तुम्हे,

मेरी माँ को 

उसके दीपक का स्मरण 

जरूर कराना ।।

मेरे मात-पिता को

साहस दिए फिरना,

रोदन राग न लिए फिरना ।।

                   Written by–RITIK PANDEY

मेरी माँ      (कवि -रितिक पान्डेय)

जब उँगली पकड़

तुमने चलना सिखाया ।

मेरी माँ,

वो दिन याद आया,

और आँखों मे

आँसू लाया ।।

बावला था मै,

मेरी माँ,

जो तेरे प्यार को

समझ ना पाया ।।

माँ क्यों दूर हुआ,

मै तुझसे,

आज वो दिन

याद आया ।

और आँखों मे

आँसू लाया ।।
जब मै छोटा था,

तुमने हर सुख,

हर खुशी से

वाकीफ किया मुझे।

जब बड़ा हुआ,

मै तुम्हे समय न दे सका।
माफ कर मेरी माँ मुझे,

मै बड़ा बदनसीब था,

जो तेरे प्यार को

समझ न सका ।।
जब कभी 

मेरी आँखो मे 

आँसू आया ।

तुमने मुझे,

अपनी गोद मे खिलाया।
लेकीन आज तेरी याद मे

मै रो दिया ।।
मेरी माँ 

वो दिन याद आया,

और आँखो मे 

आँसू लाया ।।

                    (Written by- RITIK PANDEY)

स्वच्छता —(रितिक पान्डेय)

निकली टोली आज,

हम मातृभूमी के लालों की।

ज़ज्बा लेकर चले हैं हम,

सुंदर चमन बनाने को।।

चमक्ते सितारे के जैसा,

अपना वतन बनाने को।

निकली टोली आज हमारी,

सुंदर चमन बनाने को।।

साफ है दिल के, सच्चे हम,

अपने वतन के बच्चे अच्छे हम।

चलो साथीयों, निकले अब,

भारत को स्वच्छ बनाने को।

निकली टोली आज हमारी,

सुंदर चमन बनाने को।।

बाते कर ली बड़ी-बड़ी,

छोटी बात भूला दी है।

रास्ते पर खुद कूड़ा फेंका,

भाषण मे आसमान उठा ली है।।

वादा किया इन्होने,

स्वच्छ भारत बनाने को।

कूड़ा देखा सड़क पर,

शर्माते इसे उठाने को।।

समझाएँ क्या इन्हे हम,

क्या रह गया बताने को।

चलो साथीयों, निकले अब,

भारत को स्वच्छ बनाने को।।

मोदी जी की तैयारी है,

अब हमारी बारी है।

आओ मित्रों, आगे आओ,

भारत को स्वच्छ बनाने को।।

        Written by–(RITIK PANDEY)

शायर की जवानी —(रितिक पान्डेय)

पल भर जीवन की कहानी है,

फिर मिट्टी मे मिल जानी,

मुझ शायर कि जवानी है।।

परेसान ना हो, जिंदगी से,

जिंदगी की वसुल बहुत पुरानी है।।

कभी गम आनी है, 

तो, कभी खुशीयाँ भी आनी है,

कहते हैं, ये जिंदगी बड़ी सयानी है।।

कभी हार आनी है, 

तो, कभी जीत भी आनी है,

यहीं तो जिंदगी की कहानी है।

फिर मिट्टी मे मिल जानी,

मुझ शायर की जवानी है।।

शायर रहे ना रहे,

वो लब्ज जीवित रह जानी है,

जो गुनगुनाए, मुझ शायर की जुबानी है।।

यहीं तो जिंदगी की कहानी है,

वर्षों के साथ, पल भर मे खो जानी है,

बाद मे, बस यादें रह जानी है,

ये जिंदगी की वसुल बहुत पुरानी है।।

         Written by–(RITIK PANDEY)

बेवफा —(रितिक पान्डेय)

दिल की बातें,

दिल हीं जाने,

दिल कि है क्या

ख्वाहीशें ।।

जाने क्यों 

बिन बादलों के,

भीगा देती हैं

बारिशें ।।

उस बेवफा के

आँसुओं से

जल रहा 

एक आग है।।

हर सीने के

धड़कनों मे,

धड़कता एक 

राग है ।।

कहने को 

वो बेवफा,

मेरे ये दिल की

जान है।।

उस बेवफा के

आँसुओं से

जल रहा

एक आग है।।

   


     (Written by- RITIK PANDEY)

आजादी —(रितिक पान्डेय)

एक वक्त था,

जब गुलाम थे हम,
और हमारा देश।

बहुत रूलाया 

उस गुलामी ने

हमे और 

हमारे देश को।

अजा़ब बड़ा था,

देश के अफ़सानो का।

ज़रा भी अत्फ न था

उन अज़नबीयों को।

सर कलम कर दिया,

देश के क्रांतिकारीयों का।

देशवासीयों के अश्कों से 

भीगा दिया मातृभूमी को।

ज़रा भी अत्फ न था,

उन अज़नबीयों को।।

लड़ रहे थे हम,

अपने किस्मत से।

फिर असर आया 

इस लड़ाई का।

आगाज़ हुआ यहाँ से

हमारे विजय का।

लम्हे बीतते गये,

असर बढता गया।

एक दिन अन्त आया 

उन आसिम अज़नबीयों का,

जब लहु मे ज्वाला उठा

हमारे देश के 

क्रांतिकारीयों का।

संयोग आया फिर

देशवासीयों के आज़ादी का।

        Written by – RITIK PANDEY

मेघा ——(कवि- रितिक पान्डेय)

मेघा आ, मेघा आ,

अब तो हमको

ना तड़पा।

जल्दी से 

वषॊ ला,

फिर से धरा को,

स्वगॆ बना।।

तुझ बिन 

ये धरा,

हो गया है 

अधमरा।

अपनी मोती जैसी 

बूंदों से,

कर दे धरा को

हरा-भरा।।

मुझॊ से गये है,

ये पुष्प व कलियाँ।

सुनसान से 

हो गयें है,

तुझ बिन 

ये गलियाँ।।

कहती हैं ये,

पुष्प व कलियाँ,

महीनों हो गए,

मिले तुझसे।

रह पाएँ हम,

तुझ बिन कैसे।।

ऐसी क्या ,

खता हुई हमसे।

जो हमसे रूठ कर 

बैठा है कबसे।।

माफ कर 

हमारी खता को,

और मिलने आजा 

फिर हमसे।।

महका दे,

इन पुष्पों को,

चहका दे,

इन कलियों को,

जो मुझॊए 

बैठे हैं कबसे।।

अब तो आ,

ओ मेघा।

और धरा को,

स्वगॆ बना।।

बंजर सी भूमि पर,

फिर से 

हरीयाली ला।।

आ ओ मेघा,

अब तो आ।

और धरा को

स्वगॆ बना।।

              Written by –RITIK PANDEY